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Hymn No. 2451 | Date: 24-Sep-2001
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आंसू न बहाना मेरे हाल पे, लग जायेगी यार मेरे दिल को ठेस।
आंसू न बहाना मेरे हाल पे, लग जायेगी यार मेरे दिल को ठेस।
वो तो चुराने आया था, भटक के जा पहुँचा मन के मनमाने संसार में।
देखें थे ख्वाब रंग भरने के, पुरूषार्थ से मिलने वाले अंजाम में।
अडिग बना फिरता था, न जाने क्यों तुझपे से विश्वास डिग गया।
तेरे पास रहके लगा रोना रोने अपने हालात पे, ये कैसे हो गया।
जागते हुये सोने का किया बहाना, तेरी न करके तुझपे औरो का दोष लगने दिया।
कसम से कुछ न करने का दम तो ना भरता हूँ, पर तेरी सजा को सर झुकाके कबूल करुँगा।
दिल फट जायेगा पर मन से न चित्कार करुँगा, ये जोकर हंसते हंसाते तेरा गीत गायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह