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Hymn No. 2452 | Date: 25-Sep-2001
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ले चल, ले चल मुझे तू प्यार के संसार में, जहां भेद न हो कोई अपने पराये का।
ले चल, ले चल मुझे तू प्यार के संसार में, जहां भेद न हो कोई अपने पराये का।
हर पल तैयार हो हर कोई लूटने लुटाने को, वहाँ कहना न हो कौन है गैर कि अपना।
ख्वाबों की करे न वहाँ कोई बात, जो चाहे वो हो यथार्थ में बिना किसी को ठेस पहुँचाये।
प्यार का हो चारो ओर साम्राज्य, तेरा मेरा न करके हर दिल का हो उसपे कब्जा।
जज्बा कभी न हो कम किसीका, किसी को भी देना पड़े चाहे सब कुछ अपना।
रब के लिये न करे कोई फरियाद, किसी भी पल करे चाहे कोई कितनी भी मुलाकात।
चलता रहे दौर पीने ओर पिलाने का, धीरे धीरे अंतर में नया कोई गुल खिलाने का।
चांद तारे भी शरमाये अंतहीन हो प्यांर से भरी रात, बिना किसी हिचक के तैयार रहे शबाब।
चले ना जोर प्यार के शिवाय कुछ ओर का, हर दिल हर पल प्यार में होता रहे साराबोर।
इंतजारी के दौर को खत्म करके पहुँचा दे मजिल पे, पहुंचके भूल जाऊँ अपने आपको वहाँ पे।


- डॉ.संतोष सिंह