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Hymn No. 2453 | Date: 26-Sep-2001
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मैं ओर मेरी शायरी बखान करे तेरी, फिर भी लगे कुछ ऐसा कही छूट जाये कहने को बहुत कुछ।
मैं ओर मेरी शायरी बखान करे तेरी, फिर भी लगे कुछ ऐसा कही छूट जाये कहने को बहुत कुछ।
बहुत बार समझाया, पर ये नादान दिल न समझा, न जाने ऐसा क्या कहना वो तुझसे चाहे।
बीतते जायें पल दर पल, रहे उधेड़ बुन में हर पल, कसम से बहुत कुछ कहके भी चैन न आये दिल को।
बात तो दोई आखर की थी, बयाँ भी कईयों ने किया था, न जाने वो कौन से रीत से कहना चाहे।
हर पल तड़पाये, पर तड़पने में भी मजा आये, मजा आ रहा है तो क्यों वो तुझे गुहार लगाये।
दिन पे दिन गुजरे, धीरे धीरे वर्षा भी बदले, पर मेरा हाल प्रभु तेरे प्यार में क्यों ना बदले
बहुल जाल बिछाया, नये नये प्यार के हथियार आजमाये, पास आ आके तू दूर होता गया हमसे
चैन न है हमको, न ही मेरे दिल को, जो किस्मत की लेखनी को बदलना चाहे प्यार से अपने
हसरत न है दिल में कुछ ओर की, सारी कसरत है तेरे वास्ते, फिर भी कई कई बार समझ न पाऊँ तेरी बात।
मियाँ की दौड़ जैसे मस्जिद तक है, मेरी दौड़ तो तुझ तक है, कर्मों की बात न मान न ही पुरूषार्थ की जानूँ, पर तेरे गले में प्यार की माला डालना हूँ चाहता।


- डॉ.संतोष सिंह