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Hymn No. 2454 | Date: 27-Sep-2001
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जो बात दिल में है, तो न रहने दे दिल में।
जो बात दिल में है, तो न रहने दे दिल में।
मन चाहता है कहना कुछ, तो शब्दों का जाम पिला दे।
मुश्किल हो जाता है, जो कहना चाहके कह नहीं पाता हूँ कुछ।
तब अनायास ओढ़ लेता हूँ जामा गुमसुम हो जाने का।
विचारों में गोता लगाते हुये जुड़ता हूँ यार तब तुझको।
उतरे हुये चेहरे पे मुस्कान छा जाती है ख्यालों में मिलते।
कहता हूँ तब, अब तक क्यों दूर रखा है प्यार से तेरे।
अब तक क्यों तरसता फिर रहा हूँ प्यार को तेरे।
जो बात रहती है दिल में, तो क्यों ना आती है जुबा पे।
कमी जो भी है, यार तू पूरी करवा ले मुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह