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Hymn No. 2461 | Date: 30-Sep-2001
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दोष है मेरा तो मिले सजा मुझको, क्यों तड़पाये तू मेरे दिल को।
दोष है मेरा तो मिले सजा मुझको, क्यों तड़पाये तू मेरे दिल को।
तू दूर जाके कहना चाहते हो क्या, क्यों नही कहता सीधे तू मुझसे।
जब तक दूर था तो बात अलग थी, पास बुलाके खामोश क्यों है तू।
कमियों को मेरी ना दोष दो बेवफाई का, प्यार किये बिन सितम मत ढा तू दिल पे।
आज तक तेरे आगे नजरों को उठाया ना कभी, इसका मतलब ये तो नहीं जो चाहे तू सिला दे।
तेरे बनाये हुये खिलौने हैं तो क्या नींद से, जाग गये तो कयामत ढा देंगे हम भी।
ये ख्वाबों की बात होगी तो क्या से, इक बार को फिर से इतिहास दोहराये हम देंगे हम
किस्मत कर्मों के नाम पे छकाने वाले, इक बार को हम भी तुझे चौंका देंगे।
सितमगर बनाया है तुझे तो क्या से, सितम ढाके तेरे जहां को हिला देंगे हम।


- डॉ.संतोष सिंह