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Hymn No. 2462 | Date: 22-Sep-2001
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यादों के झरोखों से गीतों की महफिल सजाने आया हूँ।
यादों के झरोखों से गीतों की महफिल सजाने आया हूँ।
जो बात दिल की है, उसे प्यार का नाम देने आया हूँ।
विसर न जाऊँ कहीं, तो विरह की आग लगा दी तूने।
मन जो न माना तो, दे दूंगा उसे अपने हाथों से सजा।
जो हो गया सब कुछ तो, कहूंगा मालिक की है कृपा।
हर नाज नखेर उठा के, बनूंगा सदा के वास्ते आशिक तेरा।
साया भी साथ छोड़ता हो तो साथ छोड़के पकडूंगा हाथ तेरा।
कहानी भले लिखी हो किस्मत ने, किरदार निभाऊँगा बनके कहा करके तेरा।
दिया है प्यार का हथियार, तो मिलन का इतिहास रचने आया हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह