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Hymn No. 2463 | Date: 02-Oct-2001
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यूं ना इलजाम देता हूँ तुझे, करता रहता है करनामा जो तू चूपचाप।
यूं ना इलजाम देता हूँ तुझे, करता रहता है करनामा जो तू चूपचाप।
किस्मत के नाम पे तू छेड़ता रहता है हमको जो ता उम्र तक।
फिर भी कहे चाह तू कुछ भी, तुझे अपना मालिक ही समझूंगा।
उम्मीदों के दायरे से बंधके, चुपचाप सब्र का घूंट पीते इम्तहां देता रहूँगा।
हाय फिर कोई भी कसर तू ना है छोड़ता, कर्मों का नाम दे देके।
तुझे क्या हूँ, तेरे पास आके गंवारा ना करता हूँ कुछ कहने का।
मेरा दिल भी ना रहा मेरा, तेरा नाम आने पे करता है अब बगावत।
लुटा तो सबने था, लुटा तूने भी पर तेरा लूटना भाये मेरे दिल को।
न जाने कैसा है तेरा अंदाज, जो अभी तक हमारे मन ने समझ न पाया।
फिर भी प्यार करता हूँ, हर बार यही बात दिल ने है दोहराया।


- डॉ.संतोष सिंह