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Hymn No. 2470 | Date: 10-Oct-2001
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न जाने कब मेरे भाव होंगे सधन दिल में, जो मजबूर कर देंगे तुझको।
न जाने कब मेरे भाव होंगे सधन दिल में, जो मजबूर कर देंगे तुझको।
न जाने कब मेरे अरमान होंगे पूरे, जो तुझको साथ रखेंगे हर पल मेरे।
न जाने कब मेरे ख्यालात बदलेंगे हकीकत में, जो तुझको बना लेगो अपना।
न जाने कब रंग भरेंगे ख्वाबों में मेरे, ख्वाबों की दुनिया से तुझको चुरा लूंगा।
न जाने कब तेरे दिल की बातें उमड़ेगी मेरे मन में, कहा तेरा करते चले जाने के लिये।
न जाने कब सीखूंगा जीना तेरे मुताबिक, तन मन का सारा भेद मिटाने के लिये।
न जाने कब पाऊंगा पार संसार सागर से, तेरी दुनिया में बस जाने के लिये।
न जाने कब उतरूंगा निगाहों में तेरे खरा, सारी दुनिया मिटाने के लिये।
जाने कब पूरी होगी मेरे दिल की साथ, तुझमें मिल जाने के लिये।
न जाने कब, न जाने कब न जाने कब का होगा सिलसिला खत्म, तेरे अथाह प्रेम सागर में डूब जाने के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह