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Hymn No. 2471 | Date: 11-Oct-2001
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आओ चले कहीं दूर इस दुनिया से, कोई नई प्यार की दुनिया में।
आओ चले कहीं दूर इस दुनिया से, कोई नई प्यार की दुनिया में।
जहाँ पे कोई भी बात ऐसी ना निकले दिल से, जो लगे ठेस किसीके मन को।
चारों तरफ हो प्यार का जलवा, बामुश्किल कहना हो कौन है अपना, कौन पराया।
आनंद में तिरता रोम रोम रहे, चारों ओर प्यार का सैलाब रहे।
छलके हर किसी का प्यार निगाहों से, क्या करना किसी जुंबा के बस की बात नहीं।
बहते रहे प्यार की मौजों पे, अंतर में जो हिलोर उठे प्यार समदर में।
छिड़ता रहे हर पल कोई ऐसा संगीत, दिल भी पिघलके सुरों में बह निकले।
ना कोई भूख हो ना कोई प्यास, बस प्यार ही जीने का अंदाज हो सबका।
वहाँ ना कोई मदिर हो या ना शिवाला, हर दिल प्रभु का आला हो।
हर पल जले प्यार की अखंड ज्योत अंतर में, महक हो प्यार की कायम फिज़ा में।


- डॉ.संतोष सिंह