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Hymn No. 2472 | Date: 13-Oct-2001
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मुश्किल है कहना कुछ तुझसे, कि तेरे दिल को रास आयेगा कि नहीं।
मुश्किल है कहना कुछ तुझसे, कि तेरे दिल को रास आयेगा कि नहीं।
हो जाता है समझाना नामुमकिन जैसे, जब नांसमझी में डुबे रहते हैं खुद।
देते हैं दुहाई तेरे खुदाई का, जुदाई के पल हैं क्यों इतने लंबे।
राज बताके न बताने जैसा रखा है, हमको कर्मों के हाथों सौंपके तूने।
कब तक ये खेल चलता रहेगा, दिलो का मेल होने देता नंही क्यों तू।
सनम खायी है हमने भी कसमें प्यार की, छोडेंगे ना साथ तेरा अब कभी।
निभायेगे ओड़ सारी रस्में, जो होगा जरूरी तेरा प्यार पाने के वास्ते।
रास्ते अब ना बदल सकते है, अंतर में जो, उतर गया है अब तू।
दास्ताँ प्यार की सुनायेगे सारे जहाँ को, तरसते है जो तेरे आशिक होने को।
अब भी कहने को बहुत कुछ बाकी है, जब तक मिलन ना होगा दिलों का।
- डॉ.संतोष सिंह
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आओ चले कहीं दूर इस दुनिया से, कोई नई प्यार की दुनिया में।
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