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Hymn No. 2474 | Date: 16-Oct-2001
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न जाने कितने तरह तरह के भाव आ रहे हैं दिल में।
न जाने कितने तरह तरह के भाव आ रहे हैं दिल में।
तुझे अपने सामने पाके झूम झूम रहा हूँ में खुशीयों से।
दिल की बाते बयां कर रही है नजरें चूर होके तेरे प्यार में।
पुलकित मन में बह रहा है, प्रभु प्रेम का नव ज्वार।
सोच सकता है ना कोई, न जाने कैसा छाया है मेरे अंग अंग में उन्माद।
बह रहा हूँ कल्पनाओं के संसार में, निरंतर गोते लगाते तेरे संग।
आस्थाओ का दीप जल उठा है, विश्वास की ज्योत से।
महक आ रही है न जाने किस ओर से, जो बढा रही है दिल की मस्ती को।
अब भी क्यों तू दूर है, क्यों कराता है अहसास साथ होने का।
जीवन लिया हूँ तेरे लिये, जो तू ना मिला जीना बेकार है।
रास रचाना चाहता हूँ तेरे संग, चूर रहके प्यार में तेरे।
बदल जाये चाहे दुनिया, मिट जाऊँ चाहे मैं, जुदा होना बस की बात नहीं तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह