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Hymn No. 2475 | Date: 18-Oct-2001
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मेरे मौला तू है, मेरा हाजी तू है।
मेरे मौला तू है, मेरा हाजी तू है।
मेरे दिल का मालिक तू है, मेरी किस्मत तू है।
मेरे रोम रोम में बसने वाला प्राण तू है, मेरे अधरों की मुस्कान तू है।
मेरे जीवन का अंजाम तू है, मेरे प्यार का आयाम तू है।
मेरे हर कदम का साथी तू है, मेरे राह की मजिल तू है।
मेरे जिंदगी का वर्तमान तू है, आने वाले भविष्य का ईनाम तू है।
मेरे अंतर का नाम तू है, मेरे प्यार का जाम तू है।
मेरे दिल में बसने वाला अखंड प्रेम तू है, मेरे नेत्रों में समायी विश्वास की ज्योत तू है।
मेरे दास्ताने मोहब्बत का पूरांण तू है, सार में कहूं तो प्यार की गीता तू है।
मेरे अंतर में गूंजने वाला अनहद नाद तू है, मेरे हद हिस्से का आकार तू है।


- डॉ.संतोष सिंह