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Hymn No. 2476 | Date: 24-Oct-2001
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बहुत बार सजाया तेरे रूप को, आज सजा दे तू मेरे दिल को।
बहुत बार सजाया तेरे रूप को, आज सजा दे तू मेरे दिल को।
बहुत बार सुनाया गीतों को, आज तू भर दे मुझमें तेरे भावों को।
बहुत बार अहसास कराया तेरा अपने आपको, अब तो तू आके बस अंतर में मेरे।
बहुत बार देखा तुझको ख्वाबों में अपने, अब तो अंतर को कर लेने दे साक्षात्कार तेरा।
बहुत बार कही तुझसे बात अपने प्यार की, अब तो कर ले तू स्वीकार।
बहुत बार किया तूने ना ना ना, अब तो तू कर दे हाँ।
बहुत बार जानना चाहा राज दूरी का, अब तो खत्म करा दे इंतजार मेरी।
बहुत बार बिताया उनींद सी रातें, अब तो खो जाने दे तेरी याँदो में।
बहुत बार गुजारा तेरे बगैर न जाने कितने दिन, अब तो हो जा हर पल का साथी।
बहुत बार कही न जाने तुझसे कितनी बातें, अब तो अंजाम दे दे उन बातों को।


- डॉ.संतोष सिंह