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Hymn No. 2477 | Date: 25-Oct-2001
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दम तो हममें नही, दम तो है तेरे प्यार में।
दम तो हममें नही, दम तो है तेरे प्यार में।
जो खत्म होती श्वासों को, बदल देती है जिंदगी में।
नाउम्मीदों से भरे इस दौर में, करती है बरसात उमंगो की।
फरियादों के घेरे से, निकाल के ले जाती है मस्ती में।
तरसते हुये जिंदगी में, बहाती है बहार बसंत का।
सलामत रखने के वास्ते, बरसाती है अपनी अनमोल कृपा।
हमदम बनाके, शिरकत कराते है प्यार की महफिल में।
गुमनाम सी भरी जिंदगी को, दे दिया है प्यार से नाम अपना।
जीवन के हिस्सों से उभरे हुये दर्द को, पी जाते है प्यार का जाम बनाके।
अधरों पे मुस्कान खिलाते, चुरा ले जाते है अंतहीन ख्वाबों में अपने।


- डॉ.संतोष सिंह