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Hymn No. 2478 | Date: 29-Oct-2001
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दिल की बात है तो, दिल में तो ना रहने दो।
दिल की बात है तो, दिल में तो ना रहने दो।
सींच दे अपने प्यार से, खिल जाये प्यार के फूलों में।
किस बात की है देरी, जब से हो गया हो गैरजरूरी।
अश्कों की कलियों को प्यार की लड़ियों में पीरोने दे।
प्यार की लत लगाके, क्यों डर दिखाता है जमाने का।
अब तो सरेआम प्यार का जाम, दिनरात पीने दे।
प्यार के दौर में तो अच्छे अच्छे समझदारों पे हावी होते हैं नासमझा।
तो इस नासमझ के दिल में, प्यार के गुलों को तो खिलने दे।
प्यार के दौर में अब ना कर और देर को, दूर कर दे देर के कारणों को।
क्या पता जो ना हुआ था, वो भी हो जाये दिल को दिल से मिलने से।


- डॉ.संतोष सिंह