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Hymn No. 244 | Date: 30-Jul-1998
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तू प्रेमियों का प्रेमी है, दिलबरों का दिलबर, रहनुमाओं का रहनुमा, तेरे आगें कोई कुछ भी नहीं ।
तू प्रेमियों का प्रेमी है, दिलबरों का दिलबर, रहनुमाओं का रहनुमा, तेरे आगें कोई कुछ भी नहीं ।
सब कुछ रहके भी तू रहता है कुछ भी नहीं, अपनी अपरंपार दौलत को लुटाता है हर पल ।
गुणों की तू खान है, फिर भी ना दिखलाये तू कीसी को, निर्गुण ही कहलायें ।
जिसने जैसे तुझको पुकारा, चुपचाप कर लेता है तू स्वीकार उस नाम को ।
जिसने जहाँ – जहाँ तुम्हे बसाया, बिन गिले – शिकवे के वहाँ है तू जा बसता ।
जिसने जैसी तेरी पूजा – प्रार्थना की, बिन टोका-टाकी के स्वीकार करता है तू उसे।
जिसनें जो कुछ भी तुझपे चढ़ाया, वो हो जाता है तेरा प्रसाद।
कितना तू शांत है, तेरे लिये लड़े है हम आपस में, सदा से, बाँटा है तुझको बार-बार;
इतना अपमान सहके तूने उफ् ना किया।
शर्मशार हो जाते है हम कई बार, अपने हर अपराध को स्वीकारते है, तेरे पास आके हर बार की तरह तू कर देता है माफ, कितना दयालु है तू ।


- डॉ.संतोष सिंह