VIEW HYMN

Hymn No. 245 | Date: 30-Jul-1998
Text Size
रंग ले, रंग ले, रंग ले अपने आपको उसके रंग में,
रंग ले, रंग ले, रंग ले अपने आपको उसके रंग में,
ओढ़ ले, ओढ़ ले, ओढ़ ले उसके नाम की चुनरी सही समय पे ।
अब पछताय होत क्या, जब चुग गयी चिड़िया सारा खेत,
समय रहते जो काम ना हो पूरा; फिर पछताने से क्या फायदा ।
ज्यादा से ज्यादा अगर है तू उसको चाहता, लेना होगा नाम,
हर पल भूलके सब कुछ करना होगा बस उसका ही ख्याल।
तब ही मन में खिलेंगा प्यार का अंकुर उसके प्रति ;
दिल में श्रध्दा का फूल खिलेगा, मिटाना पड़ेगा तुझे तेरे मै को।
जाने की कहीं जरूरत ना होगी इसे खोजने के लिये,
वो तुझे तेरे दिल में नजर आयेगा हर पल तू ऊससे बतियायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह