VIEW HYMN

Hymn No. 2483 | Date: 03-Nov-2001
Text Size
बरसों बरस बाद मिला है, मौका तेरा साथ पाने का।
बरसों बरस बाद मिला है, मौका तेरा साथ पाने का।
इंतजारो से भरा इम्तहां खत्म हुआ है, प्रभु तेरी कृपा से।
हुआ अहसास कुछ अजीब सा, दिल को तेरे पास पहुँचके।
भटकता हुआ मन को जाता है शांत, तेरे सान्निध्य में।
कैसे बताऊँ हाल अपना, तेरी रहता है न जाने कौन सा नशा।
मुर्खता कहो या बेहयाई, अपने आप पे हंसता हूँ सबके साथ मिलके।
समझा दे तू कितना भी किस्मत की लेखी, जुदा करना बस की बात नहीं।
डाल दे कितना भी कर्मों की बेड़ी, लुट जायेगी चाहत के आगे।
वश में ना रहा हूँ अब खुदके, बेबस बन गया हूँ प्यार में तेरे।
रूखाई हो या प्यार करते है दिल में लगी आग में घी का काम ।


- डॉ.संतोष सिंह