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Hymn No. 2484 | Date: 03-Nov-2001
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किस किस बात का करु शुक्रिया अदा तेरा, जब हो अनगिनत कृपा।
किस किस बात का करु शुक्रिया अदा तेरा, जब हो अनगिनत कृपा।
कोई भी पल गुजरता है मेरी जिंदगी का, जब ना होनी होगी रहमत तेरी।
तेरे कदमो को पहनाऊं अपने चाम से बनी जूती, तो भी हकदार नहीं नजरों का तेरे।
दिन रात गुजार दूं कितना भी तेरे यादों में, तेरी कृपा बिन मोहताज रहूँगा तेरे ख्वाबों को।
पल पल कर लू कितना भी नाम जप तेरा, कृपा बिन उभरेगी ना जेहन में सुरत तेरी।
बलि चढ जाऊँ कितनी भी बार वेदि पे तेरी, कृपा बिन मय्ययर ना होगा तेरा साथ।
गुलामी में गुजार दूं अनगिनत जन्मों को तेरे, कृपा बिना पा नहीं सकता प्यार तेरा।
रहूं कितना भी घोर साधना में तेरे, कृपा बिन कोई भीनता गिनती ना होगी मेरी।
दिया है सब कुछ आज तक तूने, कृपा से बेकार श्वासों को समेट ले अपने जिंदगी में।
इक संतोष के जाने से ना कुछ जायेगा, इस चमन में न जाने कितनों को तू खुश हाल कर जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह