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My Divine Blessing
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Hymn No. 2488 | Date: 04-Nov-2001
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वही सुरज आज भी है निकला निकला, फिर दिन क्यों है बदला बदला।
वही सुरज आज भी है निकला निकला, फिर दिन क्यों है बदला बदला।
पवन में यह कैसी शोखी है, जो मन को गुदगुदा रही है धीमे धीमे।
पक्षी कर रहे हैं किलोल, जैसे किसके लिये मना रहे हैं उत्सव।
इंतजारी बेकरार बनाये जा रही है, हर आहट पे दिल को धडकाये जा रही है।
अजीब सी मस्ती छायी हुयी है, मानो हर कदम पे मैं ठूमका लगा रहा हूँ।
जिस चेहरे पे नजर है टिकती, न जाने क्यों वो मुस्कुराये जा रहे है।
मानो हर किसी में होड मची हो, जल्दी से जल्दी तेरे पास पहुँचने की।
तेरे दीवानों की तो छोड़ो, सारी प्रकृती मना रही है जन्मदिन आज तेरा।
भूला बैठा है हर कोई अपनी सीमा, मिलन की होड मची है चारों ओर।
चुपके चुपके, शर्माते, सुकुचाते, थोड़ा सा इतराते तू भी अपना प्यार सब और बरसा रहा है।
- डॉ.संतोष सिंह
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