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Hymn No. 2491 | Date: 14-Nov-2001
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मनाऊँ दीपावली का त्योहार रोज रोज, तेरे अनंत प्रेम सागर में डूबके।
मनाऊँ दीपावली का त्योहार रोज रोज, तेरे अनंत प्रेम सागर में डूबके।
जलाऊँ भावों का अखंड दीप, अपने रोम रोम को तुझ में समा जाने के लिये।
बहाऊँ अश्रु की अविरल धारा, तेरे चरणों को पंखारने के वास्ते।
आलोकित कर दूँ महक भरी धूप से, मन के मेरे हर कोने को।
ओंकार का हुँकार भरूं झंकार हो अनहद नाद का मेरी नस नस को।
छेडूं मगल गीतों का राग तू हो कही भी तो खींच लाने के लिये।
बेंचेन बना दूं प्यार से अपने, तू बरसा दे अपना अनमोल प्रेम सारा धरा पे।
आयाम गढूं नित्य भक्ति के, विवश हो जाये तू साकार हो जाने के लिये।
तोड़ दूँ जन्मों की बेड़ियाँ, तेरा कहाँ कर दिखाने के लिये।
शुरूआत करूँ नये साल का परम पुरूषार्थ का जामा पहनके।


- डॉ.संतोष सिंह