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Hymn No. 2494 | Date: 18-Nov-2001
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चल पड़ा, चल पड़ा, प्यार के जोर से दिल मेरा चल पड़ा।
चल पड़ा, चल पड़ा, प्यार के जोर से दिल मेरा चल पड़ा।
अटकते हुये भी सीधे, सीधे तेरी ओर प्यार से बढ़ता चला।
ख्वाबों में चुपचाप मन की कूची से प्यार का रंग भरता रहा।
इच्छाओं के पर्वतों को लांघते हुये, सहजता से तेरी ओर बढ़ता चला।
कामनाओं की खाइयों को विचारों की दृढ़ता से लांघता चला।
लालसाओं ने जोर मारा कई बार, पर तेरे नाम की नैया से पार करता चला।
रहा हूंगा राह में बहुत पीछे, पर धीरे धीरे निरंतर तेरी ओर बढ़ता चला।
क्षीण होते हौसले पे भरते थे जान, निगाह जो पड़े आगे जाने वालों पे।
सब भूल भुलाके अंतर की मांग पे, तेरी ओर बढ़ता चलता चला।
वख्त पे वख्त गुजरता गया, विश्वास के उजाले में तेरी ओर बढ़ता चला।


- डॉ.संतोष सिंह