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Hymn No. 2495 | Date: 19-Nov-2001
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प्यार के दो मीठे बोल बोलके लूट लेते है ये सरेआम।
प्यार के दो मीठे बोल बोलके लूट लेते है ये सरेआम।
नजरों की तीर का वार कर करके घायल कर देते है ये सरेआम।
जुल्फों को हौले से लहरा लहराके मोह लेते है ये सरेआम।
गाके हौले हौले से दिल को चुरा लेते है ये सरेआम ।
कोई नया राज बता बताके जान लेते है हमारे मन की हर बात को ये सरेआम।
लबों का छुआँ जाम पिला पिलाके चुरा लेते है हमको हमसे ये सरेआम।
कसमों का वास्ता दे देके कहा करवा लेते है अपना काम हमसे ये सरेआम।
चाहत की राहत बिखेरते हुये, होश लूट लेते है ये सरेआम।
कथा सुना सुनाके अपनी बेसुंध कर देते है ये सरेआम।
गिरे खरबूजा छूरी पे या छूरी खरबूजे पे, कूर्बा हो जाते है हम हर अदा पे इनके।


- डॉ.संतोष सिंह