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Hymn No. 2496 | Date: 21-Nov-2001
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चीर के रख दे दिल को मेरे नजरों से तेरी, निर्बांध गति से सुनाऊँ प्यार के गीत।
चीर के रख दे दिल को मेरे नजरों से तेरी, निर्बांध गति से सुनाऊँ प्यार के गीत।
दौर हो जिंदगी का कोई भी, छू न सके वो मेरे अंतर को, बस जाये जो तू मेरे अंतर में।
बद से बदतर हालातों में मुस्कराता जाऊँ, अहसास हो जो मन को तेरे साथ साथ होने का।
पड़ाव आये कैसा भी जिंदगी का, बिना रूके बढ़ता जाऊँ, कायम रहे जो सिलसिला तेरे साथ चलने का।
जमाने का रंग हो कैसा भी, पर उतरे न कभी तेरे प्यार का रंग मेरे दिल पर से।
लोगों का क्या कहना कहते रहे चाहे वो कुछ, कुछ से परे रहू मैं बनके सबकुछ तेरा।
निभाऊँ जमाने भर की सारी रस्में, कसम से न टूटने देना जो खायी है कसम तेरे संग।
अंत हो जाये अंतहीन राह का, जो सोचा हूँ उसे पूरा कर देना प्रभु तेरे संग जोड़के।
गिरे गाज कितनी भी आंच न आने दूंगा तेरे प्यार पे, पर प्यार के भावों को बढ़ाते जाना तू मेरे दिल में।
इक् बार कहूंगा फिर से चीर के रख दे तू मेरे दिल को, निर्बाध गति से सुनाऊँ प्यार के गीत तुझको।


- डॉ.संतोष सिंह