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Hymn No. 2502 | Date: 29-Mar-2001
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जब तेरे चरणों में आके बैठ गया तो, तेरे सिवाय कुछ ओर याद करना नहीं चाहता हूँ।
जब तेरे चरणों में आके बैठ गया तो, तेरे सिवाय कुछ ओर याद करना नहीं चाहता हूँ।
जब दिल ने नाता तुझसे जोड़ लिया तो, तेरे सिवाय किसी ओर से नाता नहीं जोडना।
जब दिवाना हो गया तेरे प्यार में तो, तेरे सिवाय किसी ओर के वास्ते दिवाना बनना नहीं चाहता हूँ।
जब खाली कसम तेरे संग जीने मरने की तो, किसी ओर के संग कसम नहीं खाना है।
जब भावो में बह गया तेरे तो तोरे सिवाय किसी ओर के भावों में बहंना नही चाहता हूँ।
जब देख लिया तुझे अपने ख्वाबों में तो, तेरे सिवाय किसी ओर के ख्वाब देखना नही चाहता हूँ।
जब मन भी लगा भागने तेरे पीछे पीछे तो, तेरे सिवाय किसी ओर के पीछे भागना नहीं चाहता हूँ।
जब अंतर में मच गयी पुकार तेरी तो, तेरे सिवाय किसी ओर को पुकारना नही चाहता हूँ।
जब अनमोल मिल गया है तू तो, तेरे सिवाय कितना भी हो मूल्यवान पाना नहीं चाहता हूँ।
जब मजिल की ओर जाती राह मिल गयी तो, तेरे सिवाय किसी ओर राह पे जाना नही चाहता हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह