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Hymn No. 2503 | Date: 29-Nov-2001
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बहुत कुछ निर्भर है मेरे ऊपर, तो सब कुछ निर्भर है तेरे ऊपर।
बहुत कुछ निर्भर है मेरे ऊपर, तो सब कुछ निर्भर है तेरे ऊपर।
मिला है बीच राह में तू जरूर, पर आदि अंत है मेरी राह का तू।
कितना भी रहूँ अपने सहारे, पर तेरे सहारे चलती है जिंदगी मेरी।
कहने को तो सारा संसार है, पर संसार के हर कण में तेरा वास है।
समंझा सकते है बहुत कुछ तेरे बारे में, पर मौन में छिपा है जो तेरा राज।
अंत कर नहीं सकता सारे कयासो का, पर दृठ़ प्रयासों से पहुंचा जा सकता है तेरे पास।
कर्मवानों से परे न है कुछ, पर निष्काम रहने वालों की तो है दुनिया।
अजीबो गरीब है तेरी बानगी, पर सबसे सरल है तेरी शान।
नाचीच करता है एक ही बात, शब्दों को बदलके क्याँ करता है तेरा प्यार।
अपनी तड़प को बदलता है भावों में, गीतों के सागर में से गागर को भरते हुये।


- डॉ.संतोष सिंह