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Hymn No. 2504 | Date: 30-Nov-2001
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एक बार नही कई बार कहूंगा तुझसे, जो देखके तुझको होता है कुछ कुछ मुझको।
एक बार नही कई बार कहूंगा तुझसे, जो देखके तुझको होता है कुछ कुछ मुझको।
ये जलवा है तेरे प्यार का या विरह वेदना है मेरे दिल की।
सम्भालें नहीं सम्भलते मेरे कदम, जैसे कि नशे में चूर हूँ सारे दिन से।
बयाँ करना चाहता हूँ हाल दिल का, फड़कते है लब गुम हो जाते है शब्द।
मुरझाये हुये जिस्म पे बरसात होती है, जब निगाहों से निगाह कोई बात कहती है।
दौर पे दौर गुजर जाता है, जब जाने को उधत होता है तो वख्त का ख्याल आता है।
तन से दूर ख्यालों में करीब, मनचाही राह से आता रहता है तू मेरे दिल में।
जिंदगी के हर पल बड़ी नागवारी में है गुजरते, जो होके होता नहीं तू पास मेरे।
छूटने को अब छूट जाये चाहे सब कुछ, तू छोड़ना न कभी बीच राहों में हमको।
हमारी मजिल ओर पड़ाव, राह न जाने ओर क्या क्या बन गया है तू सब कुछ।


- डॉ.संतोष सिंह