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Hymn No. 2505 | Date: 03-Dec-2001
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सुबह हो या शाम रहता है दिल मेरा एक ही धुन में।
सुबह हो या शाम रहता है दिल मेरा एक ही धुन में।
जागते रहूँ या सोते, देखता रहता हूँ एक ही सपना।
ख्यालों की तो मत पूछो, उठते बैठते घूमता रहता हूँ तेरे पीछे।
ऐसी कोई न बात होती है, जो जुड़ी न हो तुझसे।
सवालों की झड़ी लगी रहती है मनमें देता है तू जवाब दिल में।
इरादा तो है पक्का, फिर भी इंतजार नहीं लगता है अच्छा।
कब तक चलेगा खेल लूंका छिपी का, होने नही देता तू क्यों ना मेंल दिलो का।
हसरत है हजरत को अपना बनाने की, बनाके अंपना मिल जाने की।
तकदीर का चाहा हो गया है, पुरूषार्थ का पांना अभी बाकी है।
तेरे रहते कर दिखाना है, दुनिया को जीतके तुझे जीत लेना है।


- डॉ.संतोष सिंह