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Hymn No. 2506 | Date: 03-Dec-2001
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पिलाते जा, पिलाते जा, पिलाने में ना रखना तू कोई कसर।
पिलाते जा, पिलाते जा, पिलाने में ना रखना तू कोई कसर।
हमने भी खायी है कसम, निकले चाहे दम, पीने से न बाज आयेगे हम।
तसब्वुर मिलता है दिल को पीने में, चाहे वख्त हो या बेंवख्त।
बेंमजा जिंदगी में मजा आने लगा, जब से पीने लगा तेरे हाथों से।
बसेरा बन गया जो तेरा दिल में मेरे, न जाना पड़ता है कही ओर पीने को।
पीते पीते तरस बढ़ती जा रही है मेरी, पीने के बाद भी करता है दिल ओर पीने को।
याद, ख्याल ओर ख्वाब हो गये गुंम पीने में, पीने के सिवाये कोई ओर ख्याल न है।
पीते पीते गिर जाये परदा जिंदगी का, पीने के सिवाय होश न है हमको जीने का।
रुसवाई हो या खुशी पीने में, पीने के सिवाय फुरसत न है हमको किसीकी।


- डॉ.संतोष सिंह