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Hymn No. 2507 | Date: 04-Dec-2001
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चैन नही है मेरे दिल को, जब से देखा है तुझको।
चैन नही है मेरे दिल को, जब से देखा है तुझको।
तेरे करीब रहके मोहताज हैं तेरे प्यारको, जब से जाना है तुझको।
तिरता रहा हूँ अपने ख्यालों में, पूरा करने के लिये अपने अंदाजो को।
सबब एक ही अपनी जिंदगी में, जी लूँ जिंदगी तेरा बनके।
उम्मीद लगाये बैठा हूँ, कभी न कभी पूरी होगी हसरत मेरी।
तरसता रहता हूँ मयखाने में बैठके, इक् अदद घूंट के वास्ते।
बंद हो गये मेरे जिंदगी के सारे रास्ते, जब से जुड़ गया हूँ तेरे साथ।
नाचीज की न है कोई बिसात, फिर भी करता है तुझे याद।
निभाना चाहता हूँ प्यार की सारी रस्म, टूट जाये चाहे मेरी हर कसम ।


- डॉ.संतोष सिंह