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Hymn No. 2509 | Date: 05-Dec-2001
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सिखा दे प्यार का सब, भुला न पाऊँ जिंदगी भर के लिये।
सिखा दे प्यार का सब, भुला न पाऊँ जिंदगी भर के लिये।
गुम हो जाये इक् बार को श्वास मेरी, पर उतारे न उतरे प्यार का सरूर तेरा।
जरूरत होगी जिंदगी में बहुत कुछ की, पर जो न पा सका प्यार तेरा।
हर हसरत पूरी होते हुये भी चैन गुमां बैठूंगा दिल का अपने।
शमा जल जलके खाक होती है, यहाँ तो खाक होके भी तड़पेगे।
तड़प मिटाये न मिटेगी किसीके, जब तक प्यार बनके प्यार में समा न जाऊँ।
अब किसी ओर दामन से बंधना रास न आयेगा, जब से लगा ठप्पा इस दास पे तेरा।
दोष होगा कितना भी मेरा पर अब न उठाने दूंगा जमाने को ऊंगली तुझपे।
मेरी कुव्वत से परे है तू तो क्या, जो मिला दे तू तेरी अकत कुव्वत।
तो ऐसा न कुछ होगा जो मेरी पहुँच से बाहर होगी तू ओर तेरी दुनिया।


- डॉ.संतोष सिंह