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Hymn No. 2511 | Date: 06-Dec-2001
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तेरा अंदाज है सबसे निराला, किसी का भी दिल चुराने का।
तेरा अंदाज है सबसे निराला, किसी का भी दिल चुराने का।
किसी को अपना बनाये, न दर्शाना कि है तू अपना या बेगाना।
ओर किसी को छेड़ बात बात पे, पल भर को न रहने दे चुप तू।
दिल्लगी करते करते चुरा लेता है दिल, कानोंकान न खबर हो किसीको।
कोई कह सकता नहीं, कब किसका दिल चुरा ले जायेगा तू।
बातों ही बातों में भेद खोल देता है मन में छिपी बातों का।
इक् साथ प्यार की रस्म न जाने, कितने कितनो के साथ निभाये तू।
संसार की व्यवहारिकता को अपने प्यार में साराबोरकरके मस्ती में रहे तू।
जमाने के ठुकराये हुओं को, अपने दर पे स्वीकारता है तू।
बांधे रखता है तू प्रेम से, प्रेम के सिवाय स्वीकारे कभी न कुछ।


- डॉ.संतोष सिंह