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Hymn No. 2512 | Date: 06-Dec-2001
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तेरी शान में मौला, कसीदे पढ़ना चाहता हूँ प्यार का।
तेरी शान में मौला, कसीदे पढ़ना चाहता हूँ प्यार का।
ढोल बजाते बजाते, गली गली, नांचते फिरते गाते रहना चाहता हूँ प्रेम गीतों को।
कहे चाहे कोई कुछ, सर आँखो पे रखके हुक्म बजाऊँ तेरा।
सौदागर हूँ संसार का, पर बसेरा बनाना चाहता हूँ प्यार की दुनिया में।
अपने परायों से परे, अपनों ही अपनों के दिलों में रहना चाहता हूँ प्यार बनके।
तेरा सजदा हो मेरा प्यार, उसमें बीते मेरी जिंदगी का हर पल।
गुल खिलते रहे दिलों में, बहाते रहना अनवरत नजरों से प्यार तेरा।
चाहिए न ओर कुछ, चाहत प्यार बन गया हो जो तू मेरा।
जाना न है अब किसी मंदिर मस्जिद में, जो वहाँ रहने वाला आके बस गया दिल में।


- डॉ.संतोष सिंह