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Hymn No. 2515 | Date: 12-Dec-2001
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तरन्नुम में जन्म लेती है प्यार की तरंग, तो तब धड़कता है दिल।
तरन्नुम में जन्म लेती है प्यार की तरंग, तो तब धड़कता है दिल।
ओर कातिल नजरों का वार जब होता है, तब भी तड़पता है बिचारा दिल।
इतने पे भी प्यार करने वाले तड़पते है, प्यार के एक नजरों के वास्ते।
परवाह न रहती है जमाने की, न ही अपने जिस्म के जल जाने की।
पल पल बेखबर रहके रमता है यार के ख्यालों में बनके दीवाना।
एक ही चाहत रहती है, रहे समायी नजरों में तसवीर यार की।
करना चाहता है कुर्बान सब कुछ, पर कुर्बां कर न पाये यार की यादों को।
दौर पे दौर गुजरता है जो प्यार में, तब भी तड़पे न जाने किस बात के वास्ते।
खैरवार का न रहता है मोहताज, रहता है आमादा मिटने को हर बात पे।
दूश्वार हो जाता है जीना, जब इक् तरफ लग जाती है दोनों ओर से।


- डॉ.संतोष सिंह