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Hymn No. 2514 | Date: 12-Dec-2001
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पुकार मची है दिल में तेरे वास्ते, न जाने कैसी कैसी।
पुकार मची है दिल में तेरे वास्ते, न जाने कैसी कैसी।
अचरज से भर जाता हूँ, जब करता है नजरअंदाज तू।
क्या करने को फड़फड़ाते है लब, शब्द साथ छोड़ जाते हैं तब।
फिर भी जो अगर कहता हूँ, करता है तू सुनके अनसुनी।
ये कैसा प्यार है, जो अब तक ललक पैदा कर न पाया यार के दिल में।
इक् तरफ यार है, ओर दूजी ओर यार की बनायी दुनिया की सौगात।
सब कुछ छोड़के हम बहना चाहा प्यार के रौं में तेरी।
बार बार तूने एक ही बात समझाई, रहके दुनिया में हो जा तू मेरा।
कबूल करता हूँ तेरी एक नहीं, सारी बात हमारे सर माथे पे।
करता हूँ मनुहार इक् बात का, दिल में भर दे प्यार का जाम तू मेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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तू इतना अंतर में क्यों गहरे छुपा है, जो न हो पाती है मुलाकात।
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