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Hymn No. 2516 | Date: 12-Dec-2001
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कुछ भी कहो तुम मुझको, कहना न है कुछ मुझको, बस तेरा कहा करते है जाना।
कुछ भी कहो तुम मुझको, कहना न है कुछ मुझको, बस तेरा कहा करते है जाना।
क्या होगा, कैसे होगा, कब होगा, इन सवालों को न है दोहराना, न ही मन में है लाना।
सनम बस है इक् इतनी सी अरज, इस दिल को हर पल तेरे प्यार से नवाजते जाना।
पीछे ना हटूंगा अपनी बातों से, चाहे खिंच जाये खाल, अब दाल न गलने दूंगा तेरे सिवाय।
माना निभाया न होगा, पर निभाने का मौका भी तो न आया, तो जिंदगी को कैसे कुछ ओर रास जाये।
परवाह न की कभी औरों की, भले हर पल मार खाता रहा, वख्त के थपेड़ो ने तेरे पास हमें ले आया।
सच पूछों तो दिल ने न जाना था, मन थोड़ी ही देर में सबसे भर जाता था, तुझे देखते लगा कुछ हुआ मुझको।
इस बाबत में कोई शक न है मेरे दिल में, भले में न हूँ काम का, पर तेरे सिवाय किसी ओर का न था।
जिस चीज को ढूंढता था, हर चेहरे को नजर टटोलती थी, अनजाने में जाना तेरी हमको तलाश थी।
मैं भाग्यवानों में से न सही, पर अभागों में भी नहीं, मेरी किस्मत से अलग होगा तेरे बस की बात नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह