VIEW HYMN

Hymn No. 2517 | Date: 14-Dec-2001
Text Size
चांद सितारों में बात करता हूँ अपने दिलदार की।
चांद सितारों में बात करता हूँ अपने दिलदार की।
क्या करना हो जाता है मुश्किल, जब रहता है वो सामने।
अपलक निगाहों से देखता हूँ, दिल थामके बैठता हूँ।
कहता है वो, कहने में जो समायी रहती है दुनिया।
रिस रिसके गुजरता वख्त, थम जाता है उसके रहने पे।
समझाता है, समझाने में समाये रहते हैं ब्रम्हाण्ड के सारे रहस्य।
बरसाता है नजरों से वो, प्रेम की भीनी भीनी बरसात।
कुछ रखता नहीं पास अपने, लुटाते रहता है सब कुछ अपना।
ख्वाबों की दुनिया से हौले हौलके उठाके, ले जाता है यथार्थ की दुनिया मे।
सब कुछ होते हुये बनता नही कुछ भी, दुनिया में रहके दुनिया से दूर ले जाता है।


- डॉ.संतोष सिंह