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Hymn No. 2519 | Date: 18-Dec-2001
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मुश्किल हो जाता है तेरे रहते रहता नहीं दिल जो आपे में।
मुश्किल हो जाता है तेरे रहते रहता नहीं दिल जो आपे में।
जब जब मिलता हूँ, मिलते ही बढ़ जाती है धड़कन जो दिल की।
न जाने क्या कर जाना चाहता हूँ कुछ, बयां करना मुश्किल है अल्फाजो में।
सालते है तेरे न रहने पे, न जाने कितने सवाल, क्यों है दूरी अब तक।
खाता हूँ कसमें सुबह होते ही, भरसक करुँगा हर प्रयास तेरे साथ रहने की।
सांझ ढलते मद पड़ने लगती है मन की लौ, टिमटिमाते तारों की तरह लड़ता हूँ अंधरो में।
ऐसा क्या है मेरी जिंदगी में, जो दिल की चाहतों की रोके हुये है राह।
समझा समझाके हार गया, क्यों नहीं बढ़ पा रहा हूँ कर्म पथ पे।
मेरी ना हा से फर्क नहीं पड़ता तुझे, आधा अधूरा बहुत बार तड़पता हूँ तेरे लिये।
न जाने वो कौंन सा प्यार है, जो मजबूर बना दे तुझे मेरा होने से।


- डॉ.संतोष सिंह