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Hymn No. 2522 | Date: 20-Dec-2001
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कब होगा प्रवेश प्रभु, इस नीरस हृद्य में तेरा।
कब होगा प्रवेश प्रभु, इस नीरस हृद्य में तेरा।

कब गाऊंगा, गीत प्रभुं प्रेम का, ये अवघड़ जुबां मेरी।
कब झूमेगा प्रभु रोम रोम मेरा, मगन होके प्रेम में तेरे।

कब धड़क उठेगा दिल प्रभु, अचानक तुझे अपने सामने पाके।
कब मन की मौजों का प्रभु, होगा केंद्र तेरा ठिकाना।

कब सतायेगी प्रभु मुझे, तुझसे दूर रहने की प्रेम पीड़ा।
कब वह उठेंगे अश्क प्रभु, अनायास तेरे भावों में झूमते।

कब खिलेंगा प्रभु मेरे अंतर में पड़ा हुआ प्रेम बीज तेरा।
कब अहसास होगा प्रभु होता न है पल भर को तू जुदा हमसे।

कब, कब का कब होगा प्रभु अंत मेरे जीवन में से।


- डॉ.संतोष सिंह