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Hymn No. 2523 | Date: 22-Dec-2001
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चढ़ा जो तेरे प्यार का सुरूर दिल पे हमारे रंग गया रोम रोम प्यार में तेरे।
चढ़ा जो तेरे प्यार का सुरूर दिल पे हमारे रंग गया रोम रोम प्यार में तेरे।

न जाने ये कब से क्या हो गया, देखते देखते जो दुनिया मेरी बदल गयी।

वही तन था, वही मन था जिनको देखा करता था आइने में, अचानक कैसे नयापन आ गया।

मिलते थे वही पुराने चेहरे कोई अपना बनके तो कोई पराया, पर अब किसीसे भी मिलके मजा आता है हमको।

सताती है अब बहुत तेरी यादें पल दर पल के बाद, जैसे मिलके न जाने गुजर गये कितने जमाने

खाता हूँ कसमें मन ही मन अब न होश खोने की, होश खोने से पहले मदहोश हो जाऊं प्यार में तेरे।

गुजारे नही गुजरता आशिकी का ये दौर, कभी प्यार में तो कभी विरह में दिल को है डूबाते।

कशिश यूं ही खींचती रहे हमको उमंगो में, अनकहा कहां पूरा करुँगा प्यार के रंग में रंगते हुये।

रोके रूक सकता नही किसीके, बेजान जिस्म में जान पड़ गयी है प्यार कि जिसे तो खिलना है आज के दौर में।


- डॉ.संतोष सिंह