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Hymn No. 2524 | Date: 26-Dec-2001
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बदलते देख रहा हूँ पल पल जिंदगी को, पर परिस्थितियाँ नाम न ले रही है बदलने का।
बदलते देख रहा हूँ पल पल जिंदगी को, पर परिस्थितियाँ नाम न ले रही है बदलने का।
मुश्किलात राह रोके खड़ी है हर कदम पे, फिर भी तेरी ओर बढ़ने का दुस्साहस किये जा रहा हूँ।
मांगता रहा हूँ आज तक अपने लिये बहुत कुछ, फिर भी देता जा रहा है तू बहुत कुछ।
तेरी ओर से रही न कभी कोई कमी, कमियाँ तो समायी हैं प्रभु मेरे मन में।
घटनेवाली घटनाओं का कोई मतलब नही रहता, फिर भी अंतर में समाना चाहती है तेरे रहते।
मैं उंगली दिखाने न आया हूँ तेरे पास, तेरे रहते कुछ कर जाना चाहता हूँ तेरा होके।
धुआँ धुआँ हो जाये चाहे तन मेरा, पर प्यार को अपने नाम दे देना चाहता हूँ तेरा।
कभी कोई सल्तनत न मांगी तुझसे, पर जिंदगी गुजारना चाहता हूँ सुकुँ से मदद करते हुये सब की।
आँसु गिरते है तो गिरें पर तेरे भावों में बहके, जमाने में महके जमाने का रंग दे न सके मुझे
बदलते जाये दुनिया सारी, पर बदलती दुनिया में अडिग होके साकार करता रहूँ ख्वाबों को तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह