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Hymn No. 2525 | Date: 26-Dec-2001
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कई बार कहा हमने तुझसे, हाल दिल का अपने।
कई बार कहा हमने तुझसे, हाल दिल का अपने।
मुस्कराते हुये बातों ही बातों में उड़ा दिया तूने।
ध्यान जब आया नजरों से ओझल हो चूका था।
गमजदा मन ने बार - बार पुकारा दिल से तुझे।
न तू आया, न ही कोई अपना तूने पैगाम भेजा।
तकते रहा स्थिर आंखो से अधर में, पर तूने ना कोई निशां छोड़ा।
अरे क्या की थी खता, जो रूठ गया तू हमसे इतना।
प्यार करना चाहा था, ओर प्यार चाहा था तुझसे।
मेरी उजड़ी हुयी जिंदगी का, तू था गुलजार हिस्सा।
जो तू गर निकल गया तो, हम होंगे रोशन कैसे।


- डॉ.संतोष सिंह