VIEW HYMN

Hymn No. 2527 | Date: 27-Dec-2001
Text Size
प्रवेशो प्रवेशो अब तो हृद्य में ओड़ नाथों के नाथ।
प्रवेशो प्रवेशो अब तो हृद्य में ओड़ नाथों के नाथ।
सूना पड़ा है दिल मेरा, करते तेरा कब से इंतजार मैं खड़ा हूँ।
चाहतों के सपने संजोये मन में, मन ही मन करता हूँ मुलाकात।
पाना चाहता हूँ न जाने क्या कुछ, उससे पहले सौंप देना चाहता हूँ खूदको।
फिर रहा हूँ ख्यालों में विचरते, बुन रहा हूँ प्यार के गीतों को तेरे।
दौर पे दौर गुजरता जा रहा है, आस भी झिलमिलाती है सितारों की तरह।
कोई माहिर फनकार न हूँ मैं, फिर भी रिझाना चाहता हूँ तुझे।
आज नहीं तो कल हाल होता है हर दिल का, पर करना नही चाहता हूँ इंतजारी कल का।
प्यार मेरा बन चुकी है इबादत, उसे पाने के लिये देना चाहता हूँ हर शहादत ।
अब ओर न करो देर, तक्षण मेरे दिल की बात पूरी करो।


- डॉ.संतोष सिंह