VIEW HYMN

Hymn No. 2529 | Date: 28-Dec-2001
Text Size
कल क्यों, कल क्यों, कल पे टाल रखा है क्यों तूने सब कुछ।
कल क्यों, कल क्यों, कल पे टाल रखा है क्यों तूने सब कुछ।
सिखता है जीना आज मैं ओर हमारी बातों को क्यों टाल देता है कल पे।
कहना तू चाहता है क्या, कह दे तू साफ - साफ सब कुछ आज हमसे।
भरा होगा दुनिया के लिये भेंद दिल में, पर तुझसे न छिपाना चाहा कुछ।
जो थी बातें दिल में, वही बातें निकली जुबां से हंसते – हंसते।
ऐसी न थी कोई बात, जिसे छुपा के आये हों हम तेरे पास।
बनाया है हमराज तुझे अपने दिल का, तो कैसे छुपाऊँ कोई बात मन में।
तसवीर देखी है जिंदगी की तेरी निगाहों से, तो देखे गये ख्वाबों को क्यों न बयाँ करुँ।
चर्चे में तेरे भरता हूँ न जाने कितने कागजों को, तो कैसे कहूँ न तुझसे।
अब ओर न टाल तू कल पे हमको, खो जाने दे तेरी निगाहों में किरण बनके।


- डॉ.संतोष सिंह