VIEW HYMN

Hymn No. 2533 | Date: 10-Jan-2001
Text Size
कल तक करायेगा इंतजार, दिल बेसब्रा हुये जा रहा है।
कल तक करायेगा इंतजार, दिल बेसब्रा हुये जा रहा है।
टकटकी लगाये बैठा हूँ, दूर - दूर तक हलचल न है तेरे आने की।
कभी कभी लगता है दिल को, इंतजार की घड़ियाँ खत्म होने जा रही है।
आस के पास में बंधके, कयासों को खत्म होने की राह देख रहा हूँ।
विरह बेमुरव्वत भरी है, जो न जाने कितने जुल्म दिल पे ढा रही है।
यहां से वहां जहाँ भी नजर दौड़ाऊँ, लोगों से भरी राह विराम नजर आ रही है।
गजर करे हर पल इशारा, बीतने के नाम पे वहीं अड़ा हूआ है।
सुरुर क्यों न सर चढ़के बोलता, जो तुझे पास आने को मजबूर करता।
ये कैसा प्यार है, जो दिलवर तेरे पास रहके भी दिल बेकरार है।
तकरार तो खत्म हो रही है मन की, फिर क्यों उदास रहता है दिल।


- डॉ.संतोष सिंह