Hymn No. 2534 | Date: 10-Jan-2001
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, कब तक करायेगी इंतजार, कब होगा खत्म इंम्तहाँ का दौर।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, कब तक करायेगी इंतजार, कब होगा खत्म इंम्तहाँ का दौर।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, दौर पे दौर बदलता जा रहा हैं, तेरे साथ रहके क्यों हूँ वहीं पे।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, नयनों से अविरल अश्रु बह रहे है, छवि तेरी क्यों धुंधला रही है।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, पुकारते पुकारते अवरुध्द हुये जा रहा है, तेरे पायल की आवाज नहीं आ रही है।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, दिल हुये जा रहा है बेकरार, फिर भी तू कराये जा रही है इंतजार।
मैय्या मोरी, मैंय्या मोरी, जिन सपनो को देखा था, उन सपनो कब करेगी साकार तू।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, मन के सारे वहम हो गये है खत्म, कब वो तेरे असीमित मन से जुड़ेगे।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, भावों का ये अभाव क्यों है, ओर जो भाव है उनसे तू दूर क्यों है।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, सार्थक कर न सका जन्म को अपने, कब तक तू जोड़ेगे साथ अपने।
मैय्या मोरी, मैय्या मोरी, अब तो खत्म कर दे दूरी, जो जरूरी है वो करवा ले तू मुझसे।
- डॉ.संतोष सिंह
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