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Hymn No. 2535 | Date: 10-Jan-2001
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हें प्रभु अब रुकावटों का रोना नहीं रोना चाहता, पार कर जाने की ताकत तू बढ़ा दे।
हें प्रभु अब रुकावटों का रोना नहीं रोना चाहता, पार कर जाने की ताकत तू बढ़ा दे।

है प्रभु मन के तूफानों में फंसना नही चाहता, क्षुद्र मन को तू नाथ ले तेरे असीमित मन से।

हें प्रभु अब माया की धुनों पे नाचना नहीं चाहता, धड़कते हृद्य को बदल दे प्यार भरे सुरों में।

हें प्रभु अब दुष्पवृत्तियों के चलते दूर होना नहीं चाहता, मेरे चित्त को जोड़ ले पवित्र चित्त से तेरे।

हैं प्रभु अब फंसना नहीं चाहता इच्छाओं के जाल में, समेंट लें तू मुझको तेरे अमिट प्यार में।

हैं प्रभु अब कामनाओं का अंत करना हूँ चाहता मेरे अंतर को अडिग तू बना दे।

हें प्रभु अब दोष देना नही चाहता हूँ अपनी कमियों को, मुझे हर ओर से जो सबल तू बना दे।

हें प्रभु अब तेरी दी हुयी जिम्मेंदारियों को निभाना हूँ चाहता, पुरूषार्थ पथ पे चलने की ताकत तू दे दे।

हैं प्रभु अब पी जाना चाहता हूँ सफलताओं को करने के सिवाय न आये कोई ख्याल मन में।

हैं प्रभु अब सब कहा मानना चाहता हूँ तेरा, जो मजबूर कर दे तुझे मेरा बन जाने को।


- डॉ.संतोष सिंह