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Hymn No. 2539 | Date: 15-Jan-2001
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मजबुरीयत का नाम न दो प्यार को, प्यार में तो समायी है जिंदगी।
मजबुरीयत का नाम न दो प्यार को, प्यार में तो समायी है जिंदगी।

जहां रात हो कटती आँखो में, ओर दिन कटते हैं दिल से बातों बातों में।

कहना होता है मुश्किल कौन अपना कौन पराया, जब दिलदार की छवि हो निगाहों में।

सताते है रहने पे भी, न रहने पे भी, पर दिल उसी में सुकूँ पाता है।

हर अंजाम को भुगतता है, और हर अंजाम को भुगतने को रहता है तैयार।

बेकरार रहता हैं प्यार को पाने के वास्ते, उसी के धुन में गुजरती है जिंदगी सारी।

गमीं को भी न देता हैं दोष अपने, सपने में भी घेरे रहना चाहता है दर्द के अहसास को।

जमाने का दस्तूर निभाना होता है मुश्किल, फिर भी दोष नहीं देता प्यार को अपने।

आंखों ही आँखों में गुजरते हे साल दर साल, फिर भी बेचैन हो जाता है पल भर न होने सें।

कहता रहे चाहे कोई कुछ भी, कहने से परे हो रहता है प्यार की मस्ती में वो अपने।


- डॉ.संतोष सिंह