VIEW HYMN

Hymn No. 2541 | Date: 20-Jan-2001
Text Size
कैसे कहूं, केसे कहूं, ओर जब कहने की बारी आयी तो कह न पाऊँ।
कैसे कहूं, केसे कहूं, ओर जब कहने की बारी आयी तो कह न पाऊँ।
औरं जब कह दूँ तो कहने का संतोष दिल को हो न पाये।
ये अधूरापन कैसा है, जो समझके भी दूर न कर पाऊँ।
कई बार उठे मन में अनायास, जो दिल के बगैर हो न पाये।
ओर जब दिल कहना चाहे तो, तू बहुत दूर नजर आये।
कैसे भी करके जो गर तुझसे कह दूँ तो तू नजरों से कह जाये।
समझना चाहके जो समझ न आये, ओर जो समझूँ तो कुछ ओर समझ जाऊँ।
कब तक चलेगा खेल पहेलियों का, कब जुड़ेगे तार दिल के।
जो बिना बोले समझ लेंगे हर बात दिल में उपजने वाली को।
मतलब न होगा दूर ओर पास होने का, अहसास होगा तेरे साथ होने का।


- डॉ.संतोष सिंह