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Hymn No. 2542 | Date: 30-Jan-2001
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आरे आ - रे, आरे - आ रे, आके बस जा तू दिल में हमारे।
आरे आ - रे, आरे - आ रे, आके बस जा तू दिल में हमारे।
वहां कोई न भेद है, मिलेगा जो तू अपने आप से।
जान की न हैं कोई छेड़छाड़ खोया रहता है वो तो मस्ती में।
उतारे न उतरे है, सुरूर छाया रहता है पल पल नजरों में।
दौर पे दौर चलता है प्यार भरा, हार जीत की कोई बात नही।
लेना देना न है सपनो से कोई, न ही मतलब यथार्थ का वहां।
गुजरे हुये वख्त का, आने वाले पलो का न है कोई रोना।
बाते ओर मौन से दूर, होती है बातें दिल की तरंगो से।
अजीबों गरीब दुनिया में, सजीव होता है सब कुछ अनुभूती में।
रोते हुये हालातों में, हंसना आता है तब अपने हाल देखके।
माया में झुमते हुये भी, आमंत्रित करता हूँ तुझे पास अपने।
श्वासों के रहते साथ होके पा लेना चाहता हूँ तुझे साथ अपने।


- डॉ.संतोष सिंह